इतनी फुर्सत कहाँ
कि तन्हाई में भी
बहा सकूं आँसू
अपने छुपे ज़ख्मों पर
उनसे नजरें मिलाने की हिम्मत कौन करे
अब तो खुद से भी नजरे छुपाने की नौबत है
डरता हूँ खुद ही से
जब भी तनहा रहता हूँ
कुछ हैं ऐसी बातें जिनको
सुनता हूँ मैं ही कहता हूँ
आसान -सी जिंदगी भी
बोझिल क्यों लगने लगती इतनी
कि हर कदम रखते ही
लगती है जमीन खिसकनी
अब कौन ढूंढे दुनिंया को
और लाखों शय इसके
मालूम नहीं खुद का ठिकाना
भाग रहा पीछे किसके ?
बस चली जा रही हैं साँसे , धडकता जा रहा है दिल
कटी जा रही जिंदगी यूं ही, मुस्किल-दर -मुस्किल
सच, मुझे नहीं पता ज़रा भी
कैसे-क्या हुए जा रहा है
करने को रहा और क्या
होने दो जो हुए जा रहा है !
कि तन्हाई में भी
बहा सकूं आँसू
अपने छुपे ज़ख्मों पर
उनसे नजरें मिलाने की हिम्मत कौन करे
अब तो खुद से भी नजरे छुपाने की नौबत है
डरता हूँ खुद ही से
जब भी तनहा रहता हूँ
कुछ हैं ऐसी बातें जिनको
सुनता हूँ मैं ही कहता हूँ
आसान -सी जिंदगी भी
बोझिल क्यों लगने लगती इतनी
कि हर कदम रखते ही
लगती है जमीन खिसकनी
अब कौन ढूंढे दुनिंया को
और लाखों शय इसके
मालूम नहीं खुद का ठिकाना
भाग रहा पीछे किसके ?
बस चली जा रही हैं साँसे , धडकता जा रहा है दिल
कटी जा रही जिंदगी यूं ही, मुस्किल-दर -मुस्किल
सच, मुझे नहीं पता ज़रा भी
कैसे-क्या हुए जा रहा है
करने को रहा और क्या
होने दो जो हुए जा रहा है !
