Sunday, February 28, 2010

देश के नेता

इस देश की हवाओं में एक अजब सी बात है

जो चलते-चलते रूक जाती और रूक -रूक कर चलने लगतीं

इस देश की घटाओं का न अता-पता - ठिकाना

जो बिन मौसम लगें बरसने और मौसम में भी छुप जातीं

इस देश के नेताओं के अंदाज भी हैं अजीबोगरीब

कभी हवा तो कभी घटा बन , देश को उलझाया करते

जीवन होली

तुम ऐसा रंग डालो मुझ पर जो कर दे रंगीं मेरा मन

जिस पर और दूजा रंग चढ़े ना चाहे जितना हो जतन

तुम उस रंग में भिंगो डालो मुझको , ऐ मेरे यार

जो बिखेरे खुशबू और निस्वार्थ प्यार

मैं होली खेलूँ जीवन की जीवन से

सुध हो जब मन का मन से

तुम छा जाओ बन के घटा गुलालों की

और बर्षा करो जीवन में अमृत रस की

शायद तृप्त हो जाऊं उस पल में

जब बची न हो एक बूँद नीरस जीवन की