Monday, May 18, 2009

क्या होगा जब तुम मुझसे बिछुड़ जाओगे

यही न कि तुम याद बहुत ही आओगे

और मुझे रह रह कर तर्पाओगे

जब कभी तुझे देखना चाहूँगा

तो केवल सपनों में नज़र आओगे

क्या होगा जब तुम्हारी बातें चलेंगी

यही न कि मैं उनको न सुन पाउँगा

और यूँही उठ कर चला जाऊंगा

जब कोई पूछेगा तेरे बारे में

तो कड़ी नाराजगी जताऊंगा

क्या होगा जब तुम मेरी गली से गुजरोगे

मैं छुप कर तुम्हे निहारूंगा

और तुमको नज़र ना आऊंगा

जब तुम मेरी तरफ़ देखोगे

तो तुम्हे नही देखने की रस्म निभाऊंगा

क्या होगा जब मैं दिल से लाचार हो जाऊंगा

और सारे जहाँ में एक अकेला रह जाऊँगा

जब मैं कांपते क़दमों से तेरे पास आऊंगा

और लफ्जों को हलक से गायब पाऊंगा

और नज़रों को नही उठा पाउँगा

क्या होगा जब तुम मुझे फिर से अपना लोगे

सारे गिले भुला कर मुझे दिल से लगा लोगे

और तुम मेरे लिए देवता बन जाओगे

और मैं अपनी तुच्छ सोच पर गिरता जाऊंगा

फिर भी ख़ुद को सबसे खुशकिस्मत जानूंगा

जब दोबारा तुम्हे अपने सबसे करीब पाऊंगा

Friday, May 8, 2009

हँसी अनेकों ढंग की


हँसी कई तरह की देखी हमने

छोटे बच्चे की मासूम हंसी

गरीब बाप की मजबूर हंसी

नव-धनाड्य की मगरूर हंसी

नेता की बनावटी मशहूर हंसी

हाथ मिले पर दिल से काफ़ी दूर हंसी

शर्मो-हया को चीर बेशर्मी में चूर हंसी

कड़ी-धधकती धूप में बनी राहत-ऐ-रूह हंसी

जाने कितने रंग दिखाए जादू से भरपूर हंसी।