क्या पाएंगे हम दोनों एक दूजे से खफा हो कर
मई भी जलूँगा , तुम भी जलोगे
अपने भीतर ही भीतर खुद से लड़ेंगे
और अक्सर अकेले में तर्पेंगे
बैर कब शांती लाया दिलों के बीच
वह तो प्रेम मात्र से मिलती है
क्यों तोड़ें उस नाजुक कली को
कितने आरजू से जो खिलती है
हम खुश न रहेंगे तेरे बिना
तुम भी तल्ख़ रहोगे मेरे बिना
फिर क्यों भेद करें आपस ही में
जबकि रह सकते हैं हम बैर के बिना
तुमने कभी कुछ कहा होगा
जो शायद मुझे नहीं भाया होगा
हमने भी ऐसा कुछ किया होगा
और तुम्हारा दिल दुखाया होगा
मगर क्या मुश्किल है इतना भी
उन सब बातो को भूल जाना
क्या इतना भी मुश्किल है सोचो
उन बातो को याद रखना दिल से
जिनकी यादें खुशियाँ दे जाती हैं
फिर क्यों हम रहे अकड़े- अकड़े
