Tuesday, April 20, 2010


क्या पाएंगे हम दोनों एक दूजे से खफा हो कर


मई भी जलूँगा , तुम भी जलोगे


अपने भीतर ही भीतर खुद से लड़ेंगे
और अक्सर अकेले में तर्पेंगे
बैर कब शांती लाया दिलों के बीच


वह तो प्रेम मात्र से मिलती है


क्यों तोड़ें उस नाजुक कली को


कितने आरजू से जो खिलती है


हम खुश रहेंगे तेरे बिना


तुम भी तल्ख़ रहोगे मेरे बिना


फिर क्यों भेद करें आपस ही में


जबकि रह सकते हैं हम बैर के बिना


तुमने कभी कुछ कहा होगा


जो शायद मुझे नहीं भाया होगा


हमने भी ऐसा कुछ किया होगा


और तुम्हारा दिल दुखाया होगा


मगर क्या मुश्किल है इतना भी


उन सब बातो को भूल जाना


क्या इतना भी मुश्किल है सोचो


उन बातो को याद रखना दिल से


जिनकी यादें खुशियाँ दे जाती हैं


फिर क्यों हम रहे अकड़े- अकड़े









हमारे तुम्हारे बीच

वो क्या था - वो क्यों था हमारे बीच

अब भी समझने की कोशिश करता हूँ

तुम कैसे थे- मै कैसा था

अब तो याद करने से भी डरता हूँ

क्या जीवन था - कैसा जीवन था

अब उसे सपना ही समझता हूँ

तुम कौन थे- मैं कौन था

पहचानने से दोनों को मैं डरता हूँ

हम क्यों मिले - क्यों जुदा हुए

हर पल इसी उधेड़ बुन में रहता हूँ

तुम फिर कहीं न दिख जाओ मुझे

बच-बच कर हर गली से निकलता हूँ

भूल चूका मैं तुम्हे पूरी तरह से

क्यूँ बार-बार यही मै सबसे कहता हूँ

हामारे बीच कुछ भी तो नहीं था

हर घड़ी क्यूँ इस झूट को सहता हूँ