क्या होगा जब तुम मुझसे बिछुड़ जाओगे
यही न कि तुम याद बहुत ही आओगे
और मुझे रह रह कर तर्पाओगे
जब कभी तुझे देखना चाहूँगा
तो केवल सपनों में नज़र आओगे
क्या होगा जब तुम्हारी बातें चलेंगी
यही न कि मैं उनको न सुन पाउँगा
और यूँही उठ कर चला जाऊंगा
जब कोई पूछेगा तेरे बारे में
तो कड़ी नाराजगी जताऊंगा
क्या होगा जब तुम मेरी गली से गुजरोगे
मैं छुप कर तुम्हे निहारूंगा
और तुमको नज़र ना आऊंगा
जब तुम मेरी तरफ़ देखोगे
तो तुम्हे नही देखने की रस्म निभाऊंगा
क्या होगा जब मैं दिल से लाचार हो जाऊंगा
और सारे जहाँ में एक अकेला रह जाऊँगा
जब मैं कांपते क़दमों से तेरे पास आऊंगा
और लफ्जों को हलक से गायब पाऊंगा
और नज़रों को नही उठा पाउँगा
क्या होगा जब तुम मुझे फिर से अपना लोगे
सारे गिले भुला कर मुझे दिल से लगा लोगे
और तुम मेरे लिए देवता बन जाओगे
और मैं अपनी तुच्छ सोच पर गिरता जाऊंगा
फिर भी ख़ुद को सबसे खुशकिस्मत जानूंगा
जब दोबारा तुम्हे अपने सबसे करीब पाऊंगा

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