तुम ऐसा रंग डालो मुझ पर जो कर दे रंगीं मेरा मन
जिस पर और दूजा रंग चढ़े ना चाहे जितना हो जतन
तुम उस रंग में भिंगो डालो मुझको , ऐ मेरे यार
जो बिखेरे खुशबू और निस्वार्थ प्यार
मैं होली खेलूँ जीवन की जीवन से
सुध हो जब मन का मन से
तुम छा जाओ बन के घटा गुलालों की
और बर्षा करो जीवन में अमृत रस की
शायद तृप्त हो जाऊं उस पल में
जब बची न हो एक बूँद नीरस जीवन की

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