Tuesday, April 20, 2010

हमारे तुम्हारे बीच

वो क्या था - वो क्यों था हमारे बीच

अब भी समझने की कोशिश करता हूँ

तुम कैसे थे- मै कैसा था

अब तो याद करने से भी डरता हूँ

क्या जीवन था - कैसा जीवन था

अब उसे सपना ही समझता हूँ

तुम कौन थे- मैं कौन था

पहचानने से दोनों को मैं डरता हूँ

हम क्यों मिले - क्यों जुदा हुए

हर पल इसी उधेड़ बुन में रहता हूँ

तुम फिर कहीं न दिख जाओ मुझे

बच-बच कर हर गली से निकलता हूँ

भूल चूका मैं तुम्हे पूरी तरह से

क्यूँ बार-बार यही मै सबसे कहता हूँ

हामारे बीच कुछ भी तो नहीं था

हर घड़ी क्यूँ इस झूट को सहता हूँ

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