वो क्या था - वो क्यों था हमारे बीच
अब भी समझने की कोशिश करता हूँ
तुम कैसे थे- मै कैसा था
अब तो याद करने से भी डरता हूँ
क्या जीवन था - कैसा जीवन था
अब उसे सपना ही समझता हूँ
तुम कौन थे- मैं कौन था
पहचानने से दोनों को मैं डरता हूँ
हम क्यों मिले - क्यों जुदा हुए
हर पल इसी उधेड़ बुन में रहता हूँ
तुम फिर कहीं न दिख जाओ मुझे
बच-बच कर हर गली से निकलता हूँ
भूल चूका मैं तुम्हे पूरी तरह से
क्यूँ बार-बार यही मै सबसे कहता हूँ
हामारे बीच कुछ भी तो नहीं था
हर घड़ी क्यूँ इस झूट को सहता हूँ

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