Monday, June 8, 2009

मन्दिर को जा रहे हो जरा सावधान रहना
मोबाइल को बचाना , जूतों को भी छुपाना
रहे पर्स पर नज़र भी और घड़ी को भी बचाना
चश्मा न टूट जाए कहीं भीड़ में कुचल कर
बच्चा न छूट जाए कहीं गोद से फिसल कर
ये पुजारी और भिखारी लूट न लें तुझको
कहीं ऐसा न हो जाए तुम कोसने लगो खुदको
इस भुक्तभोगी की बातों को ना भुलाना
वरना मेरी तरह तुझे भी पड़ेगा पछताना


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