ओ मेरी ख़ूबसूरत बेवफा जिन्दगी
तुझसे नफरत करता हूँ इतना जितना किसी से नहीं
क्यूँकी बिलकुल सही वक्त पर दगा दे जाती है तू
हर तमन्ना बन के रह जाती है अधूरी ख्वाब
इतना इंतज़ार कराती , इतना तडपाती है तू
सीना तोड़ देता पर्वतों का मैं और लाँघ जाता सागर को
अगर दखल न होता तेरे बदसूरत टांगो का राहों में
कौनहिम्मत दिखाता रोकने की मुझको बढ़ के आगे
अगर तेरी मनहूस सूरत दिखती न सबसे पहले मुझको
कायर नहीं था मैं तुझसे मिलने के पहले
था तेज़-उर्जा से भरा हुआ ,
था गुरूर मुझको अपने पर
जब तक तेरे छलावे में न था आया
हर बनता काम बिगाड़ा तुमने
हर मोड़ पर छकाया तुमने
सबके सामने मुझे गिराया तुमने
ओ मेरी बेशर्म हमसफ़र,
ओ मेरी गले की फाँस,
तेरे कारण न जाने कितने आंसू बहे
तेरे कारण हम हम न रहे
सुननी पडी उनकी भी जो मुंह दिखाने लायक न थे
झेलनी पडी उनकी जो खुद ही ज़िंदा शव-से थे
मगर ! वाह रे तेरी दरियादिली
वाह रे तेरी काबिलियत बर्बाद करने की
एक पल के लिए भी न भूली तू मुझको
और निभाती रही वफ़ाई आस्तीन के सांप - सी
मगर अब मैंने भी आजमा लिया है तुझको
और अब तो कोइ शिकवा-शिकायत भी नहीं
और अब कोइ तमन्ना भी नहीं, कोइ जरूरत भी नहीं
जो तेरे इंतज़ार में बैठा रहूँ, इतनी फुर्सत भी नहीं
हाँ, ग़म इसका ज़रूर रहेगा सालता मुझको हमेशा
की एक बे-वफ़ा को साथ रक्खा हमने अब तक
जिसके आगोश में कांटे ही कांटे भरे थे मेरे लिए
उसी को दामन से लगाए रहा था मैं अब तक
सितम भी ऐसा जो बयान ना कर सकूं किसी और से
आखिर तेरे सिवा कोई अपना भी तो नहीं मेरा
इसलिए निभाता रहूँगा है जब तक जीवन मेरा

wah
ReplyDeleteBadhiya abhivyakti...sundar shabdon ke sath.
ReplyDeleteआखिर तेरे सिवा कोई अपना भी तो नहीं मेरा
ReplyDeleteइसलिए निभाता रहूँगा है जब तक जीवन मेरा
Anek shubhkamnayen!
सीना तोड़ देता पर्वतों का मैं और लाँघ जाता सागर को
ReplyDeleteअगर दखल न होता तेरे बदसूरत टांगो का राहों में..
kya kah dala!